जंग का असर आम आदमी पर नहीं पड़ना चाहिए, कैबिनेट की बैठक में बोले पीएम मोदी
नई दिल्ली। खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध से हालात दिन ब दिन बिगड़ते जा रहे हैं। वैश्विक ऊर्जा का संकट गहराता जा रहा है। तेल और गैस की आर्पूर्ति पर असर पड़ने से दुनिया के अधिकांश देशों में हाहाकार मचा हुआ है। इस बीच नई दिल्ली में आज पीएम मोदी की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की बैठक हुई जिसमें कई अहम फैसले लिए गए। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने निर्देश दिया कि खाड़ी के देशों में चल रहे इस जंग का आम जनता पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी मंत्रालय और विभाग मिलकर काम करें।
पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी मिल गई है। इसके लिए करीब 8.7 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया जाएगा। इस परियोजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2019 में की थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत के सभी घरों में नल के माध्यम से साफ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ”मंत्रिमंडल ने जल शक्ति मंत्रालय के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है जिसमें जल जीवन मिशन (जेजेएम) के कार्यान्वयन को बुनियादी ढांचे के निर्माण से सेवा वितरण की ओर पुनर्गठित और पुनर्निर्देशित करने की बात कही गई है।” उन्होंने बताया कि संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान केंद्रित करते हुए जेजेएम के कार्यान्वयन के लिए मंत्रिमंडल ने कुल लागत को बढ़ाकर 8. 69 लाख करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी है, जिसमें 2019-20 में स्वीकृत 2.08 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 3.59 लाख करोड़ रुपये की कुल केंद्रीय सहायता शामिल है।
वैष्णव ने कहा कि ‘सुजलाम भारत’ नामक एक समान राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा स्थापित किया जाएगा, जिसके तहत प्रत्येक गांव को एक अद्वितीय सुजल गांव या सेवा क्षेत्र आईडी आवंटित की जाएगी, जो स्रोत से नल तक संपूर्ण पेयजल आपूर्ति प्रणाली की डिजिटल मैपिंग करेगी।
बता दें कि ईरान ने मंगलवार को दबाव बनाने की नीति के तहत इजरायल और खाड़ी देशों पर नए हमले किए। इस युद्ध के चलते तेल की कीमतों में उछाल लाया है और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर गहरा असर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार ‘ब्रेंट क्रूड’ की कीमत सोमवार को बढ़कर लगभग 120 डॉलर तक पहुंच गई। हालांकि बाद में कीमत में थोड़ी नरमी आई और मंगलवार को भी यह लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल पर थी जो 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के समय की तुलना में लगभग 24 प्रतिशत अधिक है।
