तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, सजा पर रोक लगाने की याचिका की खारिज
नई दिल्ली। तहलका पत्रिका के पूर्व एडिटर इन चीफ तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जूनियर सहकर्मी से रेप के मामले में अदालत ने उनकी सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही दिवाली पर जेल से बाहर रहने की छूट देने की तरुण तेजपाल की मांग भी जस्टिस एम एम सुंदेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने खारिज कर दी है।
तरुण तेजपाल को इसी साल 6 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने 10 साल कठोर कैद की सजा सुनाई थी। उससे पहले ट्रायल कोर्ट ने तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था। ट्रायल कोर्ट के आदेश को गोवा सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी जिसके बाद उनको सजा हो गई। तरुण तेजपाल की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने 25 अगस्त को कहा था कि तेजपाल को पहले सरेंडर करना होगा उसके बाद उनकी याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। इसके बाद तरुण तेजपाल ने 14 सितंबर को गोवा की मापुसा अदालत में सरेंडर कर दिया था। उसके बाद से वो जेल में हैं। तरुण तेजपाल पर उनकी जूनियर सहयोगी ने आरोप लगाया था कि नवंबर 2013 में गोवा में थिंकफेस्ट ईवेंट के दौरान होटल की लिफ्ट में उन्होंने उसका यौन शोषण किया था।
साल 2017 से 2021 तक यह केस गोवा की मापुसा कोर्ट में चला था लेकिन तरुण वहां से बरी हो गए थे। इसके बाद मामला हाईकोर्ट गया। हाईकोर्ट में जब तरुण को सजा सुनाई गई थी तो उन्होंने खुद को ही पीड़ित बताया था और अपनी 62 साल की उम्र का हवाला भी दिया था। उधर, गोवा सरकार की तरफ से भी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई जिसमें तरुण तेजपाल की सजा को 10 साल से बढ़ाकर उम्रकैद करने की मांग की गई है।
