Jul 25 2026 / 9:46 PM

राष्ट्रपति ने मंजूर किया धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के बाद शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा विभागों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने के निर्देश दिए हैं।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को मंजूरी मिलने के बाद अब प्रह्लाद जोशी अपने वर्तमान मंत्रालयों की जिम्मेदारियों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार भी संभालेंगे। जोशी खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, ऊर्जा और उपभोक्ता मामलों के मंत्री हैं। बता दें कि इस्तीफे के बाद प्रधान ने कहा कि राष्ट्रसेवा मेरे जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस्तीफे के बाद उनके घर पर नेताओं का तांता लग गया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी, दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह समेत भाजपा और एनडीए के कई बड़े नेता और मंत्री उनके घर पहुंचे और उनसे बातचीत की।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि जब धर्मेंद्र प्रधान भारत के शिक्षा मंत्री पद से विदा हो रहे हैं, तो यह उनकी दशकों के समर्पित लोक सेवा और राष्ट्र निर्माण में उनके उल्लेखनीय योगदान को स्वीकार करने और सराहना करने का अवसर है। छात्र आंदोलनों से उनके प्रारंभिक जुड़ाव से लेकर सार्वजनिक जीवन और शासन में उनकी विशिष्ट भूमिकाओं तक, उन्होंने निरंतर प्रतिबद्धता, अनुशासन और जनता, विशेष रूप से भारत के युवाओं की आकांक्षाओं के साथ गहरा जुड़ाव प्रदर्शित किया है।

इससे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि मेरे युवा साथियों, मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है। मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं।

2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद 12 साल के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनियाभर में ‘मी टू’ आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।

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