Oct 23 2026 / 2:47 PM

अरुणाचल सीमा में चीन और भारत के सैनिक आमने-सामने, ITBP DG का बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन की सीमा पर कई जगहों पर चीनी सैनिकों के साथ आमना-सामना चल रहा है। यह बात ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने 22 अक्टूबर को ITBP के 65वें स्थापना दिवस से पहले आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान अपने जवानों को संबोधित करते हुए कही।

ITBP के महानिदेशक ने चीनी PLA सैनिकों के साथ आमना-सामने की स्थिति में बेहतरीन कौशल दिखाने के लिए नई कॉम्बैट टीम, ‘शौर्य कमांडो’ को बधाई दी। ITBP प्रमुख ने कहा, हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में ऐसी स्थिति बनी, जहां कई जगहों पर आमना-सामना हुआ, और इनमें से कुछ स्थितियां अभी भी जारी हैं। वहां तैनात हमारी ‘शौर्य कमांडो’ टीमों ने बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया है।

उन्होंने आगे कहा, हमने पहले ही ITBP की हर बटालियन में एक कमांडो टीम तैयार कर ली है, और अब दो और टीमें बनाई जा रही हैं। हमारा लक्ष्य हर बटालियन में एक पूरी कमांडो कंपनी तैयार करना है। इसके अलावा, हम एक अलग बटालियन बनाने पर भी काम कर रहे हैं, जो पूरी तरह से कमांडो ऑपरेशंस के लिए होगी। हमारा ऑपरेशंस विंग इस पर काम कर रहा है, और मुझे उम्मीद है कि अगले एक-दो दिनों में इसका खाका तैयार हो जाएगा। ये बेहतरीन कमांडो यूनिट्स ITBP की एक खास पहचान बनेंगी।

इस बीच, शत्रुजीत सिंह कपूर ने ड्रोन से बढ़ते खतरों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि इस तकनीक ने पारंपरिक युद्ध के तरीकों को काफी हद तक बदल दिया है, जिसके चलते रक्षा बलों की भूमिका भी बदल रही है। उन्होंने कहा कि ITBP हर प्लाटून में एक ड्रोन यूनिट बनाने की योजना बना रही है। साथ ही, वे अपने स्तर पर ड्रोन का उत्पादन बढ़ा रहे हैं और ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षित भी कर रहे हैं। कपूर ने यह भी बताया कि जल्द ही एक अलग ‘स्ट्राइक कॉर्प्स’ (हमला करने वाली सैन्य इकाई) तैयार होने की उम्मीद है।

उन्होंने चीन द्वारा अपनी सेना, ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी’ (PLA) और उसकी मीडिया क्षमताओं में किए गए भारी निवेश का जिक्र करते हुए कहा कि बीजिंग ने पारंपरिक युद्ध के क्षेत्र में काफी प्रगति की है। हालांकि, उन्होंने सुझाव दिया कि बदलते युद्ध के मैदान में ड्रोन एक ‘बराबरी लाने वाले’ (इक्वलाइज़र) साधन के रूप में काम कर सकते हैं। रूस-यूक्रेन के लंबे समय से चल रहे युद्ध का उदाहरण देते हुए, कपूर ने कहा कि यूक्रेन जैसे छोटे देश ने पिछले चार वर्षों में रूस को जो नुकसान पहुंचाया है, वह दिखाता है कि युद्ध का स्वरूप किस तरह बदल रहा है। उन्होंने संघर्ष के बदलते स्वरूप के एक और उदाहरण के तौर पर ईरान का भी जिक्र किया।

आगे की बात करते हुए, कपूर ने कहा कि ITBP को 2030 तक अधिक फंड मिलने की उम्मीद है। इसमें से लगभग 1,000 करोड़ रुपये विशेष रूप से ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए अलग रखने की योजना है। आधुनिकीकरण की योजनाओं में मोबिलिटी (आवाजाही) और उपकरणों पर भी ध्यान दिया जाएगा, जिसमें हर तरह के इलाके में चलने वाले वाहन, ऑटोनॉमस ग्राउंड व्हीकल (स्वचालित ज़मीनी वाहन) और क्विक रिएक्शन व्हीकल (तेज़ी से प्रतिक्रिया देने वाले वाहन) शामिल हैं। इसके अलावा, बल अपने गोला-बारूद को भी आधुनिक बनाने पर विचार कर रहा है।

भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच सितंबर में पहली बार कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई थी। सूत्रों के अनुसार, जिन इलाकों में हाल ही में नए मुद्दे सामने आए हैं, वहां चीनी सैनिकों के रवैये को लेकर भारतीय सेना ने बहुत सख्त रुख अपनाया है। LAC को लेकर भारत और चीन की अपनी-अपनी अलग समझ है। इस अलग-अलग समझ के कारण कई बार आमने-सामने की स्थिति बन जाती है और अन्य समस्याएं पैदा हो जाती हैं। अब तक, LAC से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए भारत और चीन लद्दाख सेक्टर में चुशुल-मोल्डो बॉर्डर मीटिंग पॉइंट पर कोर कमांडर स्तर की बैठकें करते रहे हैं।

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