Sep 12 2026 / 9:19 AM

पुतिन को पीएम मोदी ने भेंट की तमिल किताब, भारत की संस्कृति का दस्तावेज है तिरुक्कुरल

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति और व्लादिमीर पुतिन को ‘तिरुक्कुरल’ पुस्तक भेंट के रूसी अनुवाद की प्रति भेंट की है। मोदी के द्वारा अपने खास दोस्त को विशेष उपहार के रूप में इस पुस्तक को दिए जाने के बाद अब हर कोई यह जानना चाह रहा है कि आखिर इस पुस्तक में क्या है और ये किसकी रचना है? क्या इसका रूस से भी कोई कनेक्शन है? आइए आपको इसके बारे में बताते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स समिट से पहले राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान उन्हें जिस ‘तिरुक्कुरल’ के रूसी अनुवाद की प्रति भेंट की वो तमिल संत तिरुवल्लुवर द्वारा रचित तमिल काव्य संग्रह है।

प्रसिद्ध दार्शनिक एवं संत तिरुवल्लुवर ने अपने इस काव्य संग्रह में जीवन दर्शन से जुड़े कई संदेश दिए हैं। तिरुक्कुरल में कुल 133 अध्याय और 1330 दोहे हैं। हर अध्याय में 10-10 दोहे हैं। यह पूरी पुस्तक मुख्य रूप से तीन भागों में बंटी है पहला- अरम (धर्म/नैतिकता), दूसरा- पोरुल (अर्थ/राजनीति और शासन) और तीसरा-इनबम (प्रेम)।

किताब का पहला हिस्सा अरम (धर्म/नैतिकता) में अच्छे आचरण, सदाचार, सच्चाई, दया, अहिंसा, कृतज्ञता, पारिवारिक व सामाजिक जीवन में नैतिकता की सीख देता है। वहीं दूसरे हिस्से पोरुल (अर्थ/राजनीति और शासन) में राजनीति, नेतृत्व, कूटनीति, धन अर्जन आदि विषयों पर आधारित है। तीसरे हिस्से इनबम (प्रेम) में प्रेम, दांपत्य जीवन की भावनात्मक बारीकियों को काव्यात्मक ढंग से समझाया गया है।

तिरुक्कुरल की विशेष बात यह है कि इसमें हिंदू, जैन, बौद्ध और अन्य परंपराओं के विचारों भी संलग्न हैं, इसलिए इससे हर धर्म के लोग शिक्षा ले सकते हैं। तिरुक्कुरल को ‘तमिल वेद’ भी कहा जाता है। इस पुस्तकसेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ़ क्लासिकल तमिल द्वारा प्रकाशित तिरुक्कुरल का रूसी भाषा में अनुवाद नायरा म्क्रतचियन के द्वारा किया गया है।

भारतीय दर्शन और साहित्य में 17वीं शताब्दी से रूस की दिलचस्पी देखी जा सकती है। बाद में यूरोपीय भाषाओं में तिरुक्कुरल के अनुवाद रूसी विद्वानों और साहित्यकारों का ध्यान इसकी ओर गया। ऐसा बताया जाता है कि रूस के सबसे प्रसिद्ध लेखकों में से एक लियो टॉल्स्टॉय ने 19वीं सदी में इसके शुरुआती अनुवाद के माध्यम से तिरुक्कुरल के बारे में जाना था।

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