Aug 14 2026 / 10:29 PM

राष्ट्रपति मुर्मू का राष्ट्र के नाम संबोधन, बोलीं- सिंधु जल संधि को निलंबित करना राष्ट्रीय हित में

नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रपति ने नागरिकों से राष्ट्रहित और जनभागीदारी की भावना के साथ देश के विकास में योगदान देने की अपील की।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत के नागरिक देश की नियति के निर्माता हैं। विद्यार्थी, शिक्षक, वैज्ञानिक, इंजीनियर, डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी, श्रमिक और किसान समेत समाज के हर वर्ग का राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों को भारत को सर्वश्रेष्ठ बनाने की नीयत से कार्य करना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का संविधान जनभागीदारी की भावना पर आधारित है। देशवासियों ने इस भावना को आगे बढ़ाया है, जो भारतीय लोकतंत्र की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने नागरिकों से संविधान में निहित मूल कर्तव्यों का पालन करने और राष्ट्र के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति ने विभाजन विभीषिका दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि 1947 में सांप्रदायिक हिंसा के कारण लाखों लोगों को विस्थापन और शरणार्थी जीवन का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने अपनी पहचान और मूल्यों को नहीं छोड़ा। उन्होंने विभाजन के पीड़ितों के संघर्ष और साहस को नमन किया।

राष्ट्रपति मुर्मू ने सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने को राष्ट्रीय हित में उठाया गया निर्णायक कदम बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को पनाह देने वाले देश के साथ इस संधि को निलंबित करना विशेष रूप से किसानों के हित में महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि संसाधनों की कमी के कारण कोई भी नागरिक न्याय से वंचित न रहे। राष्ट्रपति ने वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध और संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज प्रगति को भी रेखांकित किया।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन के अमृत उद्यान परिसर में शाम 6 बजे ‘एट होम’ रिसेप्शन आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में करीब 650 मेहमानों के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें लगभग 100 VVIP अतिथि होंगे।

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