Mar 03 2026 / 10:48 AM

आज मां कात्यायनी की इस तरह करें पूजा, जानिए कथा, पूजा विधि

आज नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा की छठी शक्ति देवी कात्यायनी की पूजा करने का विधान है। इनका स्वरूप चमकीला और तेजमय है। इनकी चार भुजाएं हैं। दाईं तरफ का ऊपर वाला हाथ अभयमुद्रा में रहता है तो वहीं नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में है। मां कात्यायनी के बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार धारण करती हैं व नीचे वाले हाथ में कमल का फूल सुशोभित रहता है।

इनकी आरधना के दिन साधक का मन आज्ञा चक्र में अवस्थित रहता है। इनकी आराधना करने के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और जातक को रोग, शोक, संताप व भय से मुक्ति प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जो देवी कात्यायनी का पूजन, मनन करता है उसे परम पद की प्राप्ति होती है।

पौराणिक कथा के अनुसार, कात्य गोत्र में महर्षि कात्यायन ने मां भगवती जगदंबा की कठिन उपासना की और उन्हें पुत्री रूप में प्राप्त करने का आग्रह किया। मां भगवती ने इच्छा पूरी करते हुए उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया।
 

कात्यायन ऋषि के यहां जन्म लेने और सर्वप्रथम उनके द्वारा पूजे जाने के कारण यह देवी कात्यायनी कहलाईं। मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं, ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं क्योंकि भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्हीं की पूजा की थी। 

इस दिन प्रातः काल में स्नान आदि से निवृत्त होकर मां का गंगाजल से आचमन करें।

अब देवी कात्यायनी का ध्यान करते हुए उनके समक्ष धूप दीप प्रज्ज्वलित करें।
 
रोली से मां का तिलक करें अक्षत अर्पित कर पूजन करें। 

मां कात्यायानी को गुड़हल या लाल रंग का फूल चढ़ाना चाहिए। 
 
मां कात्यायनी की आरती करें और पूजा के अंत में क्षमायाचना करें।

देवी भगवती की कृपा प्राप्त करने के लिए दुर्गा सप्तशती, कवच और दुर्गा चलीसा आदि का पाठ करना चाहिए।

पूजा करते समय मां कात्यायनी के मंत्र का जाप भी करना चाहिए।
 

पूजा मंत्र- ॐ देवी कात्यायन्यै नम:

मां कात्यायनी को पूजन में शहद का को भोग जरूर लगाना चाहिए। इससे मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं।

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